Wednesday, 28 March 2012

छोटे प्रारुप में चमकना छाएगाः भारत

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाला एकमात्र ट्वंटी  मैच 30 मार्च को जोहांनसबर्ग में खेला जाएगा। यह मैच भारतीयों के दक्षिण अफ्रीका में बसने के 150 वर्ष पूरे होने पर खेला जाएगा। इस मैच के लिए रोबिन उथप्पा को सचिन तेंदुलकर की जगह शामिल किया गया है जो पहले ही ट्वंटी मैच से सन्ंयास ले चुके हैं।
एकमात्र ट्वेंटी-20 मैच के लिए दक्षिण अफ्रीकी टीम की कमान जोहन बोथा संभालेंगे । जबकि न्यूजीलैंड के खिलाफ रिकार्ड छक्के जड़ने वाले रिचर्ड लेवी को भी  टीम में शामिल किया गया है। भारत का मेजबानों के खिलाफ रिकार्ड अच्छा रहा है।
 भारत ने अपना पहलाट्वंटी मैच अफ्रीकी टीम के खिलाफ खेला था जिसे भारत ने जीता था उस मैच में दिनेश कार्तिक को शानदार प्रदर्शन के लिए मैन आफ द मैच चुना गया था। इसके बाद 2009 में सुरेश रैना के शतक से भारत ने दक्षिण अफ्रीका को हरा दिया था। ओर भारत हमेशा की तरह अपनी स्पिन गेंदबाजी  के भरोसे ही रहेगा। पिछले रिकार्ड को देखते हुए निश्चित रुप से भारत का पलड़ा ही भारी रहेगा। हालांकि मेहमानों को अपने घर में खेलने का फायदा मिलेगा। 

Monday, 26 March 2012

दमदार बांग्लादेश

भले ही बाग्ंलादेश एशिया कप का फाइनल मैच नहीं जीत पाई हो लेकिन उन्होंने  अपने शानदार खेल से न सिर्फ घरेलू क्रिकेट प्रेमियों  का बल्कि विश्व क्रिकेट प्रेमियों का दिल भी जीत लिया।
एशिया कप के शुरु होने से पहले बांग्लादेश को खिताब की दावेदारों  में भी शुमार नहीं किया जा रहा था। लेकिन उन्होंने अपनी जीवटता का बखूबी परिचय देते हुए पहले विश्व चैंपियन भारत और फिर चार बार की एशिया कप विजेता श्रीलंका को बाहर का रास्ता दिखाया। निश्चित रुप से ये जीत बाग्ंलादेश के क्रिकेट भविष्य के लिए संजीवनी काम करेगी।
भारत  पर मिली जीत को क्रिकेट पंडित महज एक तुक्का मान रहे थे लेकिन  उन्होंने जिस तरह से अगले मैच में श्रीलंका को हराया उसे देखकर कहीं से भी नहीं लगा कि वो एक नौसखिया टीम है। शुरुआत में ही बांग्लादेश ने पाकिस्तान को टक्कर देकर ये दिखा दिया कि इस टूर्नामेंट  में   उन्हें कमजोर समझना सबसे बड़ी भूल होगी।
बहरहाल, पाकिस्तान ने अपना दूसरा एशिया कप  में  जीतकर दिखाया कि वो वाकई, में किसी भी दिन सर्वश्रेष्ठ होने पर अपने से भी ज्यादा मजबूत टीम को हराने की क्षमता रखते हैं। कहना गलत न होगा कि इस जीत से पाकिस्तान में क्रिकेट को बहाल करने  में  आसानी मिलेगी।
रवि
नई दिल्ली
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Friday, 23 March 2012

अशिष्टता के दरवाजे

अशिष्टता के दरवाजेराजधानी की सड़कों पर विभिन्न प्रकार के वाहन सरपट दौड़े देंखे जा सकते हैं जो  लोगों  को उनके उद्गम स्थान से गंतव्य स्थान तक पहुचाते हैं। मगर इन वाहनों  में डीटीसी की बस सेवा अपनी एक विशेष भूमिका निभाती है। यात्रा करने का काफी शौक है, खासकर बसों  में यात्राएं करना पड़े तो सोने पे सुहागा होता है। डीटीसी की बसों में यात्रा करने वालों  में सबसे अधिक संख्या मध्यवर्गीय परिवारों  की होती है।
अभी कुछ दिनों  पहले मुझे देश के सबसे बड़े बस अड्डे  कश्मीरी गेट से साकेत की बस लेनी थी। बहुत देर प्रतीक्षा करने के बाद साकेत जाने वाली बस मेरे चंद क़दमों  की दूरी पर आ रुकी थी। जैसे-तैसे भीड़ के भंवर से निकलकर काफी मशक्कत के बाद उस सीट पर जा बैठा जहां बैठने के लिए अन्य लोग धक्का -मुक्की पर आमदा थे। सीट मिलने से खुशी साफ तौर देखी जा सकती थी। अगर सीट नहीं मिलती तो पूरी यात्रा खड़े होकर करनी पड़ती। जिससे मेरी कपड़ों  की इस्त्री के खराब होने का डर था।
बस तेज गति से आगे बढ़ रही थीं और मैं दिल्ली की हरियाली का लुफ्त उठा रहा था इतने में पीछे से आवाज आई एक्सक्यूज मी एक टिकट देना ज्यों  हीं मैंने अपनी नजरें दौड़ाई तो पाया एक महिला कंडक्टर की सीट पर बैठी है। उसके हाथ में 5,10,20,50,100 के नोट देखकर सहज अनुमान लगा लिया की इस बस में कंडक्टर एक महिला है। इसके लिए मुझे अपने मानस पटल पर दृष्टि को टटोलने की जरुरत नहीं पड़ी। महिला कंडक्टर को देखकर हैरानी भी हुई जिसका कारण यह था कि राजधानी की बसों में अधिकांशतः पुरुष ही कंडक्टर होते हैं लेकिन उस बस में  महिला कंडक्टर थी यह मेरे लिए भी दोहरी खुशी थी पहले तो यह है  एक तो पुरुष कंडक्टर की हेकड़ी से कुछ निजात मिली। और दूसरी यह है कि अब वाकई में लगता है कि देश में महिलाओं  ने पुरुषों   के वर्चस्व को चुनौती देना शुरु कर दिया है।
मैं, बस की खिड़की वाली सीट पर बैठा था जहाँ  हवा तो आ रही थी लेकिन थोड़ा असहज महसूस कर रहा था। महिला कंडक्टर लगातार टिकट काट कर यात्रियों  को दे रही थी। हालांकि वो एक कम उम्र की महिला थी लेकिन उसके टिकट देने से लग रहा था कि मानों  वह कोई पेशेवर कंडक्टर हो। यह देखकर काफी अच्छा लग रहा था कि महिलांए जो कभी समाज में अपने जीवनयापन के लिए  पुरुषों  पर निर्भर रहती थी। आज खुद आत्मनिर्भर होकर  पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है है। यह कहीं न कहीं समाज में  महिलाओं के प्रति बदलती हुई मानसिकता को दर्शाता है। यह सब सेच ही रहा था कि अगले ही पल बस झटके से रुकी स्टैंड से दो-चार लड़को का समुह देखा जो दिखने में अच्छे घर के लिए लग रहे थे। मगर, उनके आचरण से लगा कि मानों  वो लोग तहजीब की पहली कक्षा में हो चूंकि कंडक्टर एक महिला थी इसलिए लड़कों  के समूह ने कंडक्टर पर अपरोक्ष रुप से अश्लीली फब्तियां कसनी शुरु कर दी। ये देखने के बाद भी अनजान बनने की कोशिश करने लगा। महिला कंडक्टर थोड़ी सहज होने की केाशिश तो करती लेकिन, असहज होने के भाव उसके चेहरे वर साफ तौर पर देंखे जा सकते थे।
बस के आगे बढ़ने से उसमें भीड़ भी लगातार बढ़ रही थी। खिड़की से बाहर आने वाली हवा इतने लोगों  को देखकर बाहर चली जाती। ये सिलसिला यूं ही चल रहा था। मेरे मन में विचार निंरतर जन्म ले रहे थे अगर इस महिला के स्थान पर कोई पुरुष कंडक्टर होता तो क्या वाकई में लड़कों का समूह अपने संस्कारों  को भूल कर अशिष्टता के दरवाजे को लांघता। बस, अभी भी त्रीव गति से चल रही थी।
मैं, यात्रा के अंत तक यही सोचता रहा कि अगर महिलाएं इसी तरह समाज में अपनी छाप छोड़े तो पुरुष की वर्चस्वता वाले समाज को नकारा जा सकता है। यदि कहा जाए कि पुरुषों  की सत्ता को महिलाओं ने चुनौती देनी शुरु कर दी तो कोई अतिशोक्ति नहीं होगी। मेरे जेहन ये विचार अग्रसर हो ही रहे थे कि बस अचानक रुकी। भीड़ को कम होते देख समझ गया कि बस अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच गई है। महिला कंडक्टर बस को डिपो तक ले जाने में  ड्राइवर की सहायता कर रही थी। मै, अपने दफ्तर की मुड़ चुका था।

रवि

नई दिल्ली

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Thursday, 22 March 2012

मेरा मोबाइल

मेरा मोबाइलघर से नाश्ता करके अपने कॉलेज  के लिए निकलता हूं तो निकलने से पहले अपनी जींस के जेब पर जरुर हाथ मारता हूं क्योंकि  उस जेब में हमेशा एक मोबाइल रखना पड़ता है।
मेरे मोबाइल का मॉडल  नंबर 2700 है। यह नोकिया का सेट है। मैसेज कार्ड का रिजार्ज करने पर इसके बटन मेरे दिमाग से तेज चलते हैं। नेट का रिचार्ज कराने पर मेरे दोस्तों की तरह मुझसे बातें करने लगाता है। इसकी मेमोरी कार्ड मुझे टीवी देखने से रोककर अपनी जीबी या केबी की फिल्म क्लिप दिखा देती है। ये मेरे साथ रहता है। लेकिन क्लास में जाने से पहले शांत अवस्था में करना पड़ता है। क्लास से निकलने के बाद हिंदी टाईपिंग करते-करते इसकी मेमोरी कार्ड में मौजूद कोई गाना मेरी जुबां से लग जाता है। अपनों से बातें कराते-कराते जब इसकी बैटरी डाउन होने लगती है तब इसकी मासूमियत पर तरस आ जाता है। खाना खाते वक्त जब दोस्त को मैसेज करके बताना पड़ता है कि कल क्लास नहीं  है तब पिताजी का थप्पड़ कुछ देर के लिए इसे मुझसे दूर कर देता है फिर भी इसके और मेरे संबंधों में तल्खी नहीं आती। रात को जब घरवाले सो जाते है तब इसकी लीड को कानों में डालकर इसकी मेमोरी कार्ड पर जो पैसा खर्च किया गया है उसे वसूलने की कोशिश करता हूं।

Tuesday, 14 February 2012

सहारा का रवैया

सहारा का रवैया
चेन्नई में हुई बैठक के बेनतीजा निकलने के बाद सहारा और बीसीसीआई का विवाद अभी भी कायम है। सहारा ने अपने ११ सालों  के वित्तीय संबंधों  को तोड़ दिया है। हालांकि सहारा की कुछ मांगों  तो मान ली गई है लेकिन उनकी कुछ  मांगों  को बीसीसीआई ने मना कर दिया है। सहारा का कहना है कि आईपीएल पांच में पुणे वरियर्स  की टीम  में चार की जगह छ विदेशी खिलाड़ियों को खिलाने की इजाजत दी जाए जिस पर बीसीसीआई ने सहमति देने से इनकार कर दिया है। इस पर बीसीसीआई का कहना है कि हम सहारा को ये अधिकार देकर बाकी टीमों को नाराज नहीं कर सकते। 
आईपीएल नियमों  के मुताबिक आईपीएल की किसी भी टीम में चार से ज्यादा खिलाड़ी नहीं हो सकते तो क्योंकि सहारा इन  मांगों को मनवाने पर तूला पड़ा है। साथ ही सहारा का कहना है कि 2003 में आईसीसी के निर्देश पर टीम की वर्दी से सहारा का लोगो को हटा दिया था। जिसमें बीसीसीआई की कोई गलती नहीं है। सहारा और बीसीसीआई के संबंध खत्म होने के कगार पर है यदि समय रहते दोनों के बीच कोई समझौता नहीं होता है तो इसे भारतीय क्रिकेट में एक बड़े नुकसान के रुप में देखा जाएगा। वैसे अगले आईपीएल में सहारा को खेलने का फैसला खुद से करना है क्योंकि अगर पुणे वारियर्स आईपीएल  में आती है तो इस खेल के रोमांचक पहलूओं को और अच्छे तरह से लोग देख सकते हैं। देश के लोगों की भी सहारा परिवार से भावानाएं जुड़ी हुई है।
रवि
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नई दिल्ली

Monday, 13 February 2012

सहारा और बीसीसीआई के बीच मामला सुलझने की उम्मीद


सहारा और बीसीसीआई के बीच मामला सुलझने की उम्मीद 
सहारा और बीबीसीसीआई के बीच चल रहे विवाद का फैसला आज होने की उम्मीद है। सहारा ने कुछ दिनों पहले ही बीबीसीसीआई से अपने वित्त्तीय संबंध तोड़ने के अलावा पुणे वारियर्स का मालिकाना हक भी छोड़ दिया था। सहारा के संबंध तोड़ने का कारण बीसीसीआई द्वारा सहारा के नियमों व शिकायतों की अनदेखा करने को बताया है। सहारा के मुताबिक उसने आईपीएल में इस बात पर प्रवेश किया था कि मैचों की संख्या 94 होगी लेकिन कुल मैचों की संख्या 76 रही। वहीं 2003 में आईसीसी के निर्देश पर बीसीसीआई ने सहारा का लोगो हटा दिया था इसके अलावा उस समय हुए कुछ टूर्नामेंटों  में भी टीम की वर्दी से सहारा का लोगो हआ दिया था। सिर्फ यही नहीं सहारा के साथ बीसीसीआई ने पक्षपातपूर्ण रवैया भी अपनाया था। सहारा का कहना था कि रायल बैंगलुरु चैलंेजर्स को क्रिस गेल को खरीदने की दुबारा इजाजत दे दी गई। जबकि सहारा के प्रमुख सुब्रत राय ने स्टार बल्लेबाज युवराज सिंह के नहीं खेलने पर उनकी निलामी राशि को बाकी खिलाडि़यांे की राशि में जोड़ने के लिए कहा था जिसे ठुकरा दिया था। चैंपियसं लीग टूर्नामेंट में जब मुंबई इंडियंस चोटिल खिलाडि़यों की समस्या से जूझ रही थी तब उसे एक विदेशी खिलाड़ी को रखने की इजाजत दे दी गई जबकि सहारा को ऐसा करने की इजाजत नहीं दी गई थी  सहारा का करार बीसीसीआई के साथ 532 करोड़ रुपये का हुआ है। सहारा  2010 से 2013 तक बीसीसीआई को हर टेस्ट वनडे और ट्वेंटी-20 के लिए तीन करोड़ चैंतीस लाख रुपये देगा। हालाँकि  सहारा पुणे वारियर्स टीम के खिलाडि़यों को भुगतान करेगी जब तक कोई दूसरी टीम उन खिलाडि़यों को नहीं खरीद लेती। सहारा का बीसीसीआई के साथ 11 सालों का पुराना वित संबंध था।
रवि
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हिंदी पत्रकारिता

Tuesday, 31 January 2012

ऑस्ट्रलियन ओपन की खबरे



ऑस्ट्रलियन ओपन 2011 के परिणामों पर एक नजर डालते हैं। 

पुरूष एकल का खिताब सर्बिया के नोवोक जोकोविच ने स्पेन के राफेल नडाल को हरा कर जीता।
महिला एकल का खिताब बेलारुस की विक्टोरिया अजारेंका ने रुसी स्टार मारिया शारापोवा को हरा कर जीता।
मिक्सड डब्लस का खिताब बेथानी माटेक और होरियो टेकाऊ ने जीता। पेस और वेसनीना की जोड़ी को फाइनल में हराया।
पुरुष डबल्स का खिताब पेस और राडेक स्टापानेक की जोड़ी ने जीता फाइनल में ब्रायन बंधुओं को हराया।
महिला डबल्स का खिताब स्वेतलाना कुज्नेतसेवा और वेरा ज्वानोरावा ने जीता।
सानिया मिर्जा की जोड़ी मिकस्ड में महेश भूपति के साथ थी जबकि एकल में वेसनीना के साथ थी।