Tuesday, 31 January 2012

ऑस्ट्रलियन ओपन की खबरे



ऑस्ट्रलियन ओपन 2011 के परिणामों पर एक नजर डालते हैं। 

पुरूष एकल का खिताब सर्बिया के नोवोक जोकोविच ने स्पेन के राफेल नडाल को हरा कर जीता।
महिला एकल का खिताब बेलारुस की विक्टोरिया अजारेंका ने रुसी स्टार मारिया शारापोवा को हरा कर जीता।
मिक्सड डब्लस का खिताब बेथानी माटेक और होरियो टेकाऊ ने जीता। पेस और वेसनीना की जोड़ी को फाइनल में हराया।
पुरुष डबल्स का खिताब पेस और राडेक स्टापानेक की जोड़ी ने जीता फाइनल में ब्रायन बंधुओं को हराया।
महिला डबल्स का खिताब स्वेतलाना कुज्नेतसेवा और वेरा ज्वानोरावा ने जीता।
सानिया मिर्जा की जोड़ी मिकस्ड में महेश भूपति के साथ थी जबकि एकल में वेसनीना के साथ थी।

Monday, 30 January 2012

दीवार में लगी में लगी सेंध

दीवार में लगी सेंध
जिस तकनीक के सहरे द्रविड़ ने अपनी छवि टेस्ट क्रिकेट के अनुरुप ढाली और जिसके बूते उन्हें  तकनीक का विषेशज्ञ कहा जाने लगा था। अब वहीं मजबूती उनकी कमजोरी बन रही है। द्रविड़ को ‘द वाल’ मिस्टर भरोसेमंद और न जाने कितने ही नामों  से जाना जाता है। द्रविड़ ने हर बार अपनी प्रतिभा के साथ न्याय किया है। कई पूर्व दिग्गजों  के मुताबिक समकालीन समय में उनसे बेहतर तकनीक किसी भी बल्लेबाज की नहीं है।  कई पूर्व क्रिकेटर उन्हें तकनीक के मामले मे समकालीन बल्लेबाजों  में सर्वश्रेश्ठ मानते हैं।
    राहुल द्रविड़ ने अपना टेस्ट क्रिकेट करियर 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ षुरु किया था। जहां उन्हांेने 96 रनों  की षानदार पारी खेली थी। उस मैच में भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी अपना टेस्ट क्रिकेट करियर उसी मैच के साथ शुरू  किया था। खैर, द्रविड़ का टेस्ट करियर देखें तो उनका रिकार्ड बेहद षानदार रहा है। सचिन के बाद वो टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने के मामले में दूसरे नंबर के खिलाड़ी है। उनका फुटवर्क और बाउंसी गेंदों  को बखूबी खेलना लाजवाब है। सिर्फ यहीं नहीं उन्होंने  टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा कैच भी पकडे़ लिए हैं। दुनिया भर में द्रविड़ के करोड़ों  fans  हैं। इन सब खूबियों  के बावजूद आखिर इस चैंपियन बल्लेबाज को क्या हुआ है कि जिसके कारण इस बल्लेबाज को संन्यास लेने के लिए कहा जा रहा है।
आस्ट्रेलिया के साथ संपन्न सीरिज में भारत की 0-4 की हार का प्रमुख कारण द्रविड़ का बेहबद लचर pradarshan  भी रहा। टेस्ट सीरिज के दौरान उनका औसत केवल 24.18 रहा जो किसी भी नजरिए से उनकी क्षमता से मेल नहीं खाता। द्रविड़ की तकनीक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जब द्रविड़ ने 2004 में रावलपिंडी टेस्ट मैच में  270 रनों  की शानदार  पारी खेली थी तब पाक के पूर्व तेज गेंदबाज  वकार युनूस ने कहा था। अगर मैं सचिनतेंदुलकर  को 20 अच्छी गेंदे  फेकूं तो वो अपना विकेट दे सकते है लेकिन द्रविड़ के बारे में ये बात स्पष्ट रुप से नहीं कहीं जा सकती। हाल मंे संपन्न टेस्ट सीरिज में द्रविड़ पिछली सात परियों  में  से छ बार आउट हुए। ये दीवार में लगी सेंध  को दर्षाता है। जिस बल्लेबाज का विकेट लेने के लिए गेंदबाज  तरसते थे वो गेंदबाज अब उनको अपना पसंददीदा शिकार  बना रहे है द्रविड़ के खराब फार्म से ज्यादा उनके आउट होने के तरीके ज्यादा बदतर लगे। चयनकर्ता निष्चित रुप से उनके इस गैर जिम्मेदाराना प्रदर्षन से नाराज होंगे । कई पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि उन पर उम्र हावी हो रही है ये टीम से उन्हें बाहर निकालने का ये कोई मुफीद कारण नहीं है। इस समय चयनकर्ताआंे को ध्यान से टीम को ढर्रे पर ले आना है

Saturday, 21 January 2012

अनमोल संग्रह

प्यार जब  नफरत बन जाये....
तो वो आपको....
अंदर  ही अंदर....
घुटने के लिए  मजबूर कर देता है.... 

Tuesday, 17 January 2012

इशक

प्यार के लिए एहसासों का होना जरुरी है....
क्योंकि एहसासों को वही महसूस कर सकता है .......
जिसने कभी प्यार किया हो ........

Thursday, 12 January 2012

अनमोल संग्रह

इस बिगडैल  जिंदगी में .....
बचकाना सा प्यार हो गया....  
वो, जख्मों को कुरेद रही  थी....
इम्तियाज, इतना था,
हम उसे मुहब्बत समझ बैठे.
रवि
शुक्रिया

Wednesday, 11 January 2012

सिडनी हार

सिडनी टेस्ट मैच में भारतीय टीम की हार के कारणः सिडनी टेस्ट मैच में हार का पहला कारण रहा। बल्लेबाजों  का गैर-जिम्मेदाराना प्रदर्शन। टीम में मौजूद सभी सीनियर खिलाड़ी अपनी क्षमता के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। मेलबर्न फिर सिडनी टेस्ट मैच में टीम के इस दयनीय प्रदर्शन ने न सिर्फ तमाम क्रिकेट प्रेमियों  को बल्कि राष्ट्रीय चयनकर्ताओं  को भी निराश किया। टीम पहली पारी में  200 रनों  के अंदर ही सिमट गई। सचिन को छोड़ बाकी खिलाड़ी मेजबानों  की गेंदबाजों  के सामने नतमस्तक हो गए। केवल बल्लेबाजों को दोष देना गलत होगा। भारतीय टीम के गेंदबाजों ने आस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मैाका दिया। गेंदबाजों  का हाल इतना बुरा था कि टेस्ट क्रिकेट इतिहास में  पहली बार 250 रनों  से ज्यादा कि दो साझेदारियां हुई। जहीर, ईशांत उमेश के और अश्विन कोई करिश्माई प्रदर्शन नहीं कर पाए। खासकर जहीर अपने अनुभव का फायदा नहीं उठा सके। वो टीम के गेंदबाजी  विभाग की अगुआई नहीं कर पाए।    
      गुरु ग्रेग के बाद नियुक्त हुए नए कोच डंकन फ्लेचर से काफी उम्मीदें थी। लेकिन वो भी अपनी अपेक्षाओं  पर खरा नहीं उतर पाए। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं  को भी टीम का कार्यक्रम बनाते वक्त याद नहीं रहा कि अधिक क्रिकेट के कारण खिलाड़ी लगातार थक रह हैं . वेस्टइंडीज दौरे के बाद टीम को ज्यादा वक्त नहीं मिला। कप्तान धोनी भी टीम को एकजुट नहीं कर पाए। सचिन का महाशतक टीम का ध्यान बटांने में लगा रहा। फिलहाल टीम को पर्थ टेस्ट में  ध्यान लगाना चाहिए। ताकि टीम ये टेस्ट जीत कर अपना गिरा हुआ मनोबल ऊपर उठा सके। पर्थ टेस्ट में  भारत के लिए कुछ अच्छी यादें  जुड़ी हुई है। यहां टीम इंडिया ने 2007 में मेजबान टीम को हराया था। जिससे टीम इंडिया को कम करके आंकना भूल होगी। मिस्टर क्रिकेट के नाम से मशहूर माइक हसी ने कहा है कि वे भारत को कमतर  नहीं समझ नहीं सकते है।  

Tuesday, 10 January 2012

football


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Sunday, 8 January 2012

लगातार तीसरी बार विश्व के सर्वश्रेष्ठ फुटबालर बन सकते हैं मैसी


ज्यूरिख, 8 जनवरी (एएफपी) अर्जेंटीनाके फुटबालर लियानेल मैसी सोमवार को खेल के महान खिलाडि़यां की सूची में अपना नाम जर्ज करा सकते हैं। साल 2011 के दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबालर खिलाड़ी को फीफा बेलोन डि की ओर से ट्राफी मिल सकती है।
          मैसी उन खिलाडि़यों मंे शामिल है जिन्हें इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। उनके अलावा बार्सिलोना के उनके साथ झावी हर्नाडेज और रिअल मैड्रिड के क्रिस्टिायानां रोनाल्डो भी इस पुरस्कार की दौड़ में शामिल हैं। अब तक फ्रांस के जिनेडिन जिडान और ब्राजील के रोनोल्डो तीन बार यह पुरस्कार हससिल कर चुके है। फीफा ने इसकी शुरुआत 1991 में की थी आश्रै अब यह बेलोन डि से जुड़ गया। इस पुरस्कार को फ्रांस की फुटबाल पत्रिका 1956 से दे रही है। फ्रांस के माइल प्लातिनी ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने  लगातार तीन साल तक यह प्रतियोगिता जीती। उन्होंने 1983 से 1985 तक यह ट्राफी हासिल की लेकिन तब इसके लिए केवल यूरोपीय खिलाड़यों के नाम पर विचार किया जाता था।
            मैसी अगर इस ट्राफी को तीसरी बार जीतते हैं तो 24 साल की उम्र तक जीन पुरस्कार हासिल करना विश्ष्टि उपलब्धि होगी। मैसी ने 2011 में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी अगुवाई में  बार्सिलोना टीम ने चैपिंयस लीग, स्पेनिश लीग यूरोपीय सुपर कप और स्पेनिश कप जीते। मैसी ने 2011-12 में 53 गोल किएइसके अलावा उन्होंने कई गोल बनवाने में भी सहयोग दिया। मैसी ने इस सत्र में 31 गोल आगे। मैसी के साथ हालांकि यह बुरा  रिकार्ड जुड़ा हुआ है कि वे अपनी राष्ट्रीय टीम की तरफ से कभी भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। वे कोवा अमेरिका में भी कोई गोन नहीं कर पाए औश्र मेजबान अर्जेंटीना क्वार्टर  final चरण से ही बाहर हो गई थी. इससे पहले विश्व कप 2010 में  भी मैसी का यहीं हाल हुआ था।
             ज्यूरिख में सोमवार को फिर से बार्सिलोना और रिअल मैड्रिड की 2010 की प्रतिद्धंद्धिता देखने को मिलेगी। सर्वश्रेष्ठ कोच की दौड़ में बार्सिलोनो के पेप गर्डिलो और मैड्रिड के जोस मारिन्हो आमने-सामने है। उनके अलावा मैनसेटर यूनाइटेड के कोच ऐलेक्स फर्गुसन भी इस दौड़ में शामिल है। माना जा रहा है कि मैड्रिड के कोच औश्र स्टार खिलाड़ी रोनाल्डो इस समारोह में भाग नहीं लेंगे  क्योंकि उन्हें  मंगलवार को होने वाले मैच के लिए मालगा जाना है। विश्व एकादश में भी इन दोनों क्लबों को अधिक प्रतिनिधत्व मिलने की संभावना है। इसका चयन फीफा और दुनिया भर की खिलाडियों  की यूनियन  करनी है।