Sunday, 11 December 2011

                                                        TODAYS THOUGHT


                                                          Help ever hurt never.

                                                  To get respect be an example.
                                                     
                     Punishment is not the punishment rather its the time to realize the mistake.

                 Words are like chameleon which reflect their colour according to their environment.

                                                       Love lies on sacrifice

अनमोल संग्रह पार्ट थ्री

हर दिल में एक राज है,
बस..........
कहने की जरुरत है,
तुझे पाने के लिए ,
मेरा मजहब ही काफी है............
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जो लोग खुश होते है......
वे ही दुःख में होते है,
जो दुःख में होते है,
वे ही अक्सर खुश होते है,
हम दुःख में रहकर भी,
खुश होते है

Wednesday, 23 November 2011

अनोखा ख्वाब

                         अनोखा ख्वाब
आज वो नहीं आई वो  मतलब, जिसका मुझे हमेशा से इंतजार रहता था! घर से निकला  तो सोचा कि रास्ते में मुलाकात हो  जाये! मगर मिलना किस्मत में न था
थक हार  अपने बैग  में से किताब निकाली और लगा पढने! लेकिन फिर से उसका ख्याल आया ! मुझे वो बस और उसमे बैठे लोग बिल्कुल भी अच्छे नहीं लग रहे थे! रह रह कर ख्याल उसका आ रहा था! एक बारगी लगा कि कही प्यार तो नहीं हो गया! मैं तो डर गया था क्योंकि अब प्यार शब्द से डर लगता है ! खैर, बस के आगे बढने से उसकी यादें भी दिल से बाहर जाने को तैयार नहीं थी ! मगर उसे पाने का ख्वाब  अभी भी था! उम्मीद नहीं छोड़ी क्योकि उम्मीद छोड़ना मेरी फितरत में नही है!  कुछ दूरी पर वो मिली जिसका इंतजार था! दिलों पर एक उमंग की तरंग आ गयी! सोचा कि मेरा ख्वाब पूरा हो गया ! इतना खुश था कि ख़ुशी भी छोटी लगने लगी ! जैसे ही उससे मिलने उसके करीब और करीब गया कि इतने में आखें खोली तो खुद को बिस्तर पर पाया तब जाना कि अगर वो सिर्फ मेरी है तो मेरे पास जरुर आएगी क्योंकि किस्मत से ज्यादा और वक़्त से पहले न किसी को मिला है और न ही मिलेगा!

Tuesday, 22 November 2011

आरजू

आरजू 

जिंदगी में आरजू का साथ छोड़ न देना
गर मिले तो साथ किसी से साथ तोड़ न लेना
चाहो तुम इस जिंदगी में  कुछ भी हासिल करो
मगर किसी का साथ छोड़ मत देना 

Monday, 21 November 2011

अनमोल संग्रह

अनमोल संग्रह

तुझमे एक बात है
जो मेरे लिए खास है
अपनी दुआओं में शामिल करती है तू
तुझे पाने की यही सबसे बड़ी आस है

जब जब उदास होता हूँ
तेरे बारे में सोचता हूँ
तेरे बारे में सोचकर जब उदास होता हूँ तब
ख्याल आता है
कि
संभल जा कहीं
समुन्द्र की लहरों की तरह वजूद ही न रहे

सर्दी की उस रात  में
अकेला खड़ा था
यही सोचकर कि
मेरी किस्मत मुझे मिल जाये  तभी याद आया 
गर किस्मत ऐसे मिलती तो
दिन भी मेरे लिए रात होती
अनजाने रिश्तों से अच्छा है
उन यादों के साथ रहे
जो हमे कभी गम तो कभी ख़ुशी देते है

तेरी चाहत से बड़कर कुछ नहीं
तुझे दिए हुए वादों से ज्यादा कुछ नहीं
बस इतना तो बता
तेरी नफरत से कुछ ज्यादा है क्या

Tuesday, 15 November 2011

अनमोल संग्रह

शीशे को देखकर शर्मा सी जाती वो 
खुली हुई जुल्फों को संभालती
बदन पर बारिश की बूंदे
अक्सर उसकी याद दिलाती है
न जाने क्यों
आज भी याद आती है वो

न जाने क्यों
तेरा चेहरा
दीये की तरह बुझ गया
तू तो बच गई
मगर
हम आज भी
 दीये के लौं में
जल रहे है

हैरान था तेरे फैसले से
अपनी तक़दीर मानकर कबूल कर लिया
खुदा की रहमतों का ही असर है
कि
आज भी तुझे याद करता हूँ

विशवास है परवर दीगार पर वक़्त बदल देगा मेरा
आज जो जुदा है मुझसे
कल उसे मिला देगा

तेरे बारे में सोच कर हमेशा उदास रहता हूँ
मुझ बदनसीब को तो ये भी नहीं पता
कि , क्या तू भी याद करती है

मैं भी एक नशा हूँ
तू भी एक नशा है
आओं चले खिन दूर
क्योंकि जिंदगी भी एक नशा है
शुक्रिया
आपका रवि
आगे भी ऐसी ही रचना लिखता रहूँगा

उम्र

तेरी ढलती उम्र से डर नहीं
मुझे तो डर तेरी जवानी से है
जब उम्र जवां हो तो
मेरे दोस्त
मोहब्बत भी फीकी पड़ जाती है 

Monday, 14 November 2011

पीटर रोबक का निधन

पीटर रोबक का निधन
पीटर रोबट के निधन से न सिर्फ क्रिकेट जगत को भरी नुकसान हुआ बल्कि खेल जगत को भी नुकसान  हुआ है. मैंने उनके ज्यादा लेख तो नहीं पड़े लेकिन अक्सर उनकी चर्चाएं जरुर सुनता था .खुद सचिन ने भी उनके निधन पर खेद जताया.  उनकी मौत एक अनकहीं पहली न बन जाये इसलिए इस बात की तहकीकात करनी होगीं ये एक पूरे क्रिकेट जगत के लिए  भारी हानि है.
रवि

Friday, 9 September 2011

मेरी इच्छा

             मुझे क्रिकेट के डाटा को कलेक्ट करने का बहुत शौक है! कभी कभी मुझे लगता है  कि मैं क्रिकेट पर अच्छा लिख सकता हूँ और मेरा सपना है कि मैं क्रिकेट का एक बड़ा पत्रकार बनू !

Wednesday, 7 September 2011

झरोका कविता संख्या 129

मैं, जैसे ही सुबह उठा,
तो देखा की
दरवाजे के झरोके से       
मुझे कोई देख रहा है
अगल बगल में किसी की मौजूदगी से
स्वत ही नजरिया बदल गया
खिली धूप और उपर से
ठंडी ठंडी हवा दरवाजे के झरोके से
चीख चीख कर पूछ रही थी
तू कौन है
जो अनायास ही मुझ जैसे फकीर को प्यार की         
 भीख दे रही है
वो खुद से बेखबर है
बस,
यादों में उसके मैं ही हूँ,
उसके इशारों से,
अपने छत पर घुमने का खौफ सताने लगा
वो भी मजबूर है
मैं भी मजबूर हूँ
शायद
यही हमारी मजबूरी है
देखने की लालसा तो मेरी भी है
लेकिन, क्या करू जब उसकी याद आती है
तो दरवाजे के उस झरोके को देख लेता हूँ.

Tuesday, 30 August 2011

lolita noble

मैंने  अभी हाल  ही में लोलिता नोबेल पड़ा जो  १२या १४ साल की लड़की और लगभग    45 साल के प्रोफेसर   के बीच उठे प्रेम प्रसंग पर आधारित है! जिसमे प्रोफेसर hmbert  लोलिता के पीछे अपनी  हँसती खेलती जिंदगी को बर्बाद कर लेता है! इसके लेखक ब्लादिमीर नोबोकोव है, इस नोबल ने पूरे विश्व में अपने विवादों के कारण काफी सुर्खिया बटोरी! मेरे विचार से आपको ये नोबेल पड़ना चहिये !

Friday, 26 August 2011

zindgi

जिंदगी की वीरानियों में तू क्या चली गयी .
छलकते हुए,
जाम के साथ ,
अब शराब ही मेरा सहारा बन गयी