1) बरसने दो बूंदों को
बरसना उनका काम है
वो भीगा रही है उन्हें
जिसे वो अपना बनाना चाहती है.
2) बारिश में भीग गए कई ख़त
मगर
जवाब हमेशा सूखा ही मिला
3)आहिस्ता से रखो कांच जैसे नाज़ुक ख़्वाबों को
कहीं
ये टूट कर बिखर ना जाए.
4) तन्हाई की इन इमारतों में
उदासी के कमरे है कई
यहां सीढ़िया बेबस है तो
शहर बेजुबां सा है
5)इस तन्हा शहर में बेबसी की कई इमारतें है
जिससे भी पूछो पता वो नज़रे फेर लेती है.
6) अभी सोया हुआ था ये शहर
कि, तुम्हारी अहाटों ने उठा दिया
7) चाहत के रास्ते बताएंगे
दिल का
आशियाना कहां है.
8) मुझ पर इल्ज़ाम लगा
ख़ुद को बेदाग़ कर दिया
No comments:
Post a Comment