Monday, 13 February 2012

सहारा और बीसीसीआई के बीच मामला सुलझने की उम्मीद


सहारा और बीसीसीआई के बीच मामला सुलझने की उम्मीद 
सहारा और बीबीसीसीआई के बीच चल रहे विवाद का फैसला आज होने की उम्मीद है। सहारा ने कुछ दिनों पहले ही बीबीसीसीआई से अपने वित्त्तीय संबंध तोड़ने के अलावा पुणे वारियर्स का मालिकाना हक भी छोड़ दिया था। सहारा के संबंध तोड़ने का कारण बीसीसीआई द्वारा सहारा के नियमों व शिकायतों की अनदेखा करने को बताया है। सहारा के मुताबिक उसने आईपीएल में इस बात पर प्रवेश किया था कि मैचों की संख्या 94 होगी लेकिन कुल मैचों की संख्या 76 रही। वहीं 2003 में आईसीसी के निर्देश पर बीसीसीआई ने सहारा का लोगो हटा दिया था इसके अलावा उस समय हुए कुछ टूर्नामेंटों  में भी टीम की वर्दी से सहारा का लोगो हआ दिया था। सिर्फ यही नहीं सहारा के साथ बीसीसीआई ने पक्षपातपूर्ण रवैया भी अपनाया था। सहारा का कहना था कि रायल बैंगलुरु चैलंेजर्स को क्रिस गेल को खरीदने की दुबारा इजाजत दे दी गई। जबकि सहारा के प्रमुख सुब्रत राय ने स्टार बल्लेबाज युवराज सिंह के नहीं खेलने पर उनकी निलामी राशि को बाकी खिलाडि़यांे की राशि में जोड़ने के लिए कहा था जिसे ठुकरा दिया था। चैंपियसं लीग टूर्नामेंट में जब मुंबई इंडियंस चोटिल खिलाडि़यों की समस्या से जूझ रही थी तब उसे एक विदेशी खिलाड़ी को रखने की इजाजत दे दी गई जबकि सहारा को ऐसा करने की इजाजत नहीं दी गई थी  सहारा का करार बीसीसीआई के साथ 532 करोड़ रुपये का हुआ है। सहारा  2010 से 2013 तक बीसीसीआई को हर टेस्ट वनडे और ट्वेंटी-20 के लिए तीन करोड़ चैंतीस लाख रुपये देगा। हालाँकि  सहारा पुणे वारियर्स टीम के खिलाडि़यों को भुगतान करेगी जब तक कोई दूसरी टीम उन खिलाडि़यों को नहीं खरीद लेती। सहारा का बीसीसीआई के साथ 11 सालों का पुराना वित संबंध था।
रवि
8802076525
हिंदी पत्रकारिता

No comments:

Post a Comment