दीवार में लगी सेंध
जिस तकनीक के सहरे द्रविड़ ने अपनी छवि टेस्ट क्रिकेट के अनुरुप ढाली और जिसके बूते उन्हें तकनीक का विषेशज्ञ कहा जाने लगा था। अब वहीं मजबूती उनकी कमजोरी बन रही है। द्रविड़ को ‘द वाल’ मिस्टर भरोसेमंद और न जाने कितने ही नामों से जाना जाता है। द्रविड़ ने हर बार अपनी प्रतिभा के साथ न्याय किया है। कई पूर्व दिग्गजों के मुताबिक समकालीन समय में उनसे बेहतर तकनीक किसी भी बल्लेबाज की नहीं है। कई पूर्व क्रिकेटर उन्हें तकनीक के मामले मे समकालीन बल्लेबाजों में सर्वश्रेश्ठ मानते हैं।
राहुल द्रविड़ ने अपना टेस्ट क्रिकेट करियर 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ षुरु किया था। जहां उन्हांेने 96 रनों की षानदार पारी खेली थी। उस मैच में भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी अपना टेस्ट क्रिकेट करियर उसी मैच के साथ शुरू किया था। खैर, द्रविड़ का टेस्ट करियर देखें तो उनका रिकार्ड बेहद षानदार रहा है। सचिन के बाद वो टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने के मामले में दूसरे नंबर के खिलाड़ी है। उनका फुटवर्क और बाउंसी गेंदों को बखूबी खेलना लाजवाब है। सिर्फ यहीं नहीं उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा कैच भी पकडे़ लिए हैं। दुनिया भर में द्रविड़ के करोड़ों fans हैं। इन सब खूबियों के बावजूद आखिर इस चैंपियन बल्लेबाज को क्या हुआ है कि जिसके कारण इस बल्लेबाज को संन्यास लेने के लिए कहा जा रहा है।
आस्ट्रेलिया के साथ संपन्न सीरिज में भारत की 0-4 की हार का प्रमुख कारण द्रविड़ का बेहबद लचर pradarshan भी रहा। टेस्ट सीरिज के दौरान उनका औसत केवल 24.18 रहा जो किसी भी नजरिए से उनकी क्षमता से मेल नहीं खाता। द्रविड़ की तकनीक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जब द्रविड़ ने 2004 में रावलपिंडी टेस्ट मैच में 270 रनों की शानदार पारी खेली थी तब पाक के पूर्व तेज गेंदबाज वकार युनूस ने कहा था। अगर मैं सचिनतेंदुलकर को 20 अच्छी गेंदे फेकूं तो वो अपना विकेट दे सकते है लेकिन द्रविड़ के बारे में ये बात स्पष्ट रुप से नहीं कहीं जा सकती। हाल मंे संपन्न टेस्ट सीरिज में द्रविड़ पिछली सात परियों में से छ बार आउट हुए। ये दीवार में लगी सेंध को दर्षाता है। जिस बल्लेबाज का विकेट लेने के लिए गेंदबाज तरसते थे वो गेंदबाज अब उनको अपना पसंददीदा शिकार बना रहे है द्रविड़ के खराब फार्म से ज्यादा उनके आउट होने के तरीके ज्यादा बदतर लगे। चयनकर्ता निष्चित रुप से उनके इस गैर जिम्मेदाराना प्रदर्षन से नाराज होंगे । कई पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि उन पर उम्र हावी हो रही है ये टीम से उन्हें बाहर निकालने का ये कोई मुफीद कारण नहीं है। इस समय चयनकर्ताआंे को ध्यान से टीम को ढर्रे पर ले आना है
जिस तकनीक के सहरे द्रविड़ ने अपनी छवि टेस्ट क्रिकेट के अनुरुप ढाली और जिसके बूते उन्हें तकनीक का विषेशज्ञ कहा जाने लगा था। अब वहीं मजबूती उनकी कमजोरी बन रही है। द्रविड़ को ‘द वाल’ मिस्टर भरोसेमंद और न जाने कितने ही नामों से जाना जाता है। द्रविड़ ने हर बार अपनी प्रतिभा के साथ न्याय किया है। कई पूर्व दिग्गजों के मुताबिक समकालीन समय में उनसे बेहतर तकनीक किसी भी बल्लेबाज की नहीं है। कई पूर्व क्रिकेटर उन्हें तकनीक के मामले मे समकालीन बल्लेबाजों में सर्वश्रेश्ठ मानते हैं।
राहुल द्रविड़ ने अपना टेस्ट क्रिकेट करियर 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ षुरु किया था। जहां उन्हांेने 96 रनों की षानदार पारी खेली थी। उस मैच में भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी अपना टेस्ट क्रिकेट करियर उसी मैच के साथ शुरू किया था। खैर, द्रविड़ का टेस्ट करियर देखें तो उनका रिकार्ड बेहद षानदार रहा है। सचिन के बाद वो टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने के मामले में दूसरे नंबर के खिलाड़ी है। उनका फुटवर्क और बाउंसी गेंदों को बखूबी खेलना लाजवाब है। सिर्फ यहीं नहीं उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा कैच भी पकडे़ लिए हैं। दुनिया भर में द्रविड़ के करोड़ों fans हैं। इन सब खूबियों के बावजूद आखिर इस चैंपियन बल्लेबाज को क्या हुआ है कि जिसके कारण इस बल्लेबाज को संन्यास लेने के लिए कहा जा रहा है।
आस्ट्रेलिया के साथ संपन्न सीरिज में भारत की 0-4 की हार का प्रमुख कारण द्रविड़ का बेहबद लचर pradarshan भी रहा। टेस्ट सीरिज के दौरान उनका औसत केवल 24.18 रहा जो किसी भी नजरिए से उनकी क्षमता से मेल नहीं खाता। द्रविड़ की तकनीक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है जब द्रविड़ ने 2004 में रावलपिंडी टेस्ट मैच में 270 रनों की शानदार पारी खेली थी तब पाक के पूर्व तेज गेंदबाज वकार युनूस ने कहा था। अगर मैं सचिनतेंदुलकर को 20 अच्छी गेंदे फेकूं तो वो अपना विकेट दे सकते है लेकिन द्रविड़ के बारे में ये बात स्पष्ट रुप से नहीं कहीं जा सकती। हाल मंे संपन्न टेस्ट सीरिज में द्रविड़ पिछली सात परियों में से छ बार आउट हुए। ये दीवार में लगी सेंध को दर्षाता है। जिस बल्लेबाज का विकेट लेने के लिए गेंदबाज तरसते थे वो गेंदबाज अब उनको अपना पसंददीदा शिकार बना रहे है द्रविड़ के खराब फार्म से ज्यादा उनके आउट होने के तरीके ज्यादा बदतर लगे। चयनकर्ता निष्चित रुप से उनके इस गैर जिम्मेदाराना प्रदर्षन से नाराज होंगे । कई पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि उन पर उम्र हावी हो रही है ये टीम से उन्हें बाहर निकालने का ये कोई मुफीद कारण नहीं है। इस समय चयनकर्ताआंे को ध्यान से टीम को ढर्रे पर ले आना है
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