Thursday, 12 January 2012

अनमोल संग्रह

इस बिगडैल  जिंदगी में .....
बचकाना सा प्यार हो गया....  
वो, जख्मों को कुरेद रही  थी....
इम्तियाज, इतना था,
हम उसे मुहब्बत समझ बैठे.
रवि
शुक्रिया

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