अनोखा ख्वाब
आज वो नहीं आई वो मतलब, जिसका मुझे हमेशा से इंतजार रहता था! घर से निकला तो सोचा कि रास्ते में मुलाकात हो जाये! मगर मिलना किस्मत में न था
थक हार अपने बैग में से किताब निकाली और लगा पढने! लेकिन फिर से उसका ख्याल आया ! मुझे वो बस और उसमे बैठे लोग बिल्कुल भी अच्छे नहीं लग रहे थे! रह रह कर ख्याल उसका आ रहा था! एक बारगी लगा कि कही प्यार तो नहीं हो गया! मैं तो डर गया था क्योंकि अब प्यार शब्द से डर लगता है ! खैर, बस के आगे बढने से उसकी यादें भी दिल से बाहर जाने को तैयार नहीं थी ! मगर उसे पाने का ख्वाब अभी भी था! उम्मीद नहीं छोड़ी क्योकि उम्मीद छोड़ना मेरी फितरत में नही है! कुछ दूरी पर वो मिली जिसका इंतजार था! दिलों पर एक उमंग की तरंग आ गयी! सोचा कि मेरा ख्वाब पूरा हो गया ! इतना खुश था कि ख़ुशी भी छोटी लगने लगी ! जैसे ही उससे मिलने उसके करीब और करीब गया कि इतने में आखें खोली तो खुद को बिस्तर पर पाया तब जाना कि अगर वो सिर्फ मेरी है तो मेरे पास जरुर आएगी क्योंकि किस्मत से ज्यादा और वक़्त से पहले न किसी को मिला है और न ही मिलेगा!
आज वो नहीं आई वो मतलब, जिसका मुझे हमेशा से इंतजार रहता था! घर से निकला तो सोचा कि रास्ते में मुलाकात हो जाये! मगर मिलना किस्मत में न था
थक हार अपने बैग में से किताब निकाली और लगा पढने! लेकिन फिर से उसका ख्याल आया ! मुझे वो बस और उसमे बैठे लोग बिल्कुल भी अच्छे नहीं लग रहे थे! रह रह कर ख्याल उसका आ रहा था! एक बारगी लगा कि कही प्यार तो नहीं हो गया! मैं तो डर गया था क्योंकि अब प्यार शब्द से डर लगता है ! खैर, बस के आगे बढने से उसकी यादें भी दिल से बाहर जाने को तैयार नहीं थी ! मगर उसे पाने का ख्वाब अभी भी था! उम्मीद नहीं छोड़ी क्योकि उम्मीद छोड़ना मेरी फितरत में नही है! कुछ दूरी पर वो मिली जिसका इंतजार था! दिलों पर एक उमंग की तरंग आ गयी! सोचा कि मेरा ख्वाब पूरा हो गया ! इतना खुश था कि ख़ुशी भी छोटी लगने लगी ! जैसे ही उससे मिलने उसके करीब और करीब गया कि इतने में आखें खोली तो खुद को बिस्तर पर पाया तब जाना कि अगर वो सिर्फ मेरी है तो मेरे पास जरुर आएगी क्योंकि किस्मत से ज्यादा और वक़्त से पहले न किसी को मिला है और न ही मिलेगा!