मुझे क्रिकेट के डाटा को कलेक्ट करने का बहुत शौक है! कभी कभी मुझे लगता है कि मैं क्रिकेट पर अच्छा लिख सकता हूँ और मेरा सपना है कि मैं क्रिकेट का एक बड़ा पत्रकार बनू !
Friday, 9 September 2011
Wednesday, 7 September 2011
झरोका कविता संख्या 129
मैं, जैसे ही सुबह उठा,
तो देखा की
दरवाजे के झरोके से
मुझे कोई देख रहा है
अगल बगल में किसी की मौजूदगी से
स्वत ही नजरिया बदल गया
खिली धूप और उपर से
ठंडी ठंडी हवा दरवाजे के झरोके से
चीख चीख कर पूछ रही थी
तू कौन है
जो अनायास ही मुझ जैसे फकीर को प्यार की
भीख दे रही है
वो खुद से बेखबर है
बस,
यादों में उसके मैं ही हूँ,
उसके इशारों से,
अपने छत पर घुमने का खौफ सताने लगा
वो भी मजबूर है
मैं भी मजबूर हूँ
शायद
यही हमारी मजबूरी है
देखने की लालसा तो मेरी भी है
लेकिन, क्या करू जब उसकी याद आती है
तो दरवाजे के उस झरोके को देख लेता हूँ.
Tuesday, 30 August 2011
lolita noble
मैंने अभी हाल ही में लोलिता नोबेल पड़ा जो १२या १४ साल की लड़की और लगभग 45 साल के प्रोफेसर के बीच उठे प्रेम प्रसंग पर आधारित है! जिसमे प्रोफेसर hmbert लोलिता के पीछे अपनी हँसती खेलती जिंदगी को बर्बाद कर लेता है! इसके लेखक ब्लादिमीर नोबोकोव है, इस नोबल ने पूरे विश्व में अपने विवादों के कारण काफी सुर्खिया बटोरी! मेरे विचार से आपको ये नोबेल पड़ना चहिये !
Friday, 26 August 2011
Subscribe to:
Posts (Atom)