सिडनी टेस्ट मैच में भारतीय टीम की हार के कारणः सिडनी टेस्ट मैच में हार का पहला कारण रहा। बल्लेबाजों का गैर-जिम्मेदाराना प्रदर्शन। टीम में मौजूद सभी सीनियर खिलाड़ी अपनी क्षमता के मुताबिक अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। मेलबर्न फिर सिडनी टेस्ट मैच में टीम के इस दयनीय प्रदर्शन ने न सिर्फ तमाम क्रिकेट प्रेमियों को बल्कि राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को भी निराश किया। टीम पहली पारी में 200 रनों के अंदर ही सिमट गई। सचिन को छोड़ बाकी खिलाड़ी मेजबानों की गेंदबाजों के सामने नतमस्तक हो गए। केवल बल्लेबाजों को दोष देना गलत होगा। भारतीय टीम के गेंदबाजों ने आस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मैाका दिया। गेंदबाजों का हाल इतना बुरा था कि टेस्ट क्रिकेट इतिहास में पहली बार 250 रनों से ज्यादा कि दो साझेदारियां हुई। जहीर, ईशांत उमेश के और अश्विन कोई करिश्माई प्रदर्शन नहीं कर पाए। खासकर जहीर अपने अनुभव का फायदा नहीं उठा सके। वो टीम के गेंदबाजी विभाग की अगुआई नहीं कर पाए।
गुरु ग्रेग के बाद नियुक्त हुए नए कोच डंकन फ्लेचर से काफी उम्मीदें थी। लेकिन वो भी अपनी अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाए। राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को भी टीम का कार्यक्रम बनाते वक्त याद नहीं रहा कि अधिक क्रिकेट के कारण खिलाड़ी लगातार थक रह हैं . वेस्टइंडीज दौरे के बाद टीम को ज्यादा वक्त नहीं मिला। कप्तान धोनी भी टीम को एकजुट नहीं कर पाए। सचिन का महाशतक टीम का ध्यान बटांने में लगा रहा। फिलहाल टीम को पर्थ टेस्ट में ध्यान लगाना चाहिए। ताकि टीम ये टेस्ट जीत कर अपना गिरा हुआ मनोबल ऊपर उठा सके। पर्थ टेस्ट में भारत के लिए कुछ अच्छी यादें जुड़ी हुई है। यहां टीम इंडिया ने 2007 में मेजबान टीम को हराया था। जिससे टीम इंडिया को कम करके आंकना भूल होगी। मिस्टर क्रिकेट के नाम से मशहूर माइक हसी ने कहा है कि वे भारत को कमतर नहीं समझ नहीं सकते है।
ज्यूरिख, 8 जनवरी (एएफपी) अर्जेंटीनाके फुटबालर लियानेल मैसी सोमवार को खेल के महान खिलाडि़यां की सूची में अपना नाम जर्ज करा सकते हैं। साल 2011 के दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबालर खिलाड़ी को फीफा बेलोन डि की ओर से ट्राफी मिल सकती है।
मैसी उन खिलाडि़यों मंे शामिल है जिन्हें इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। उनके अलावा बार्सिलोना के उनके साथ झावी हर्नाडेज और रिअल मैड्रिड के क्रिस्टिायानां रोनाल्डो भी इस पुरस्कार की दौड़ में शामिल हैं। अब तक फ्रांस के जिनेडिन जिडान और ब्राजील के रोनोल्डो तीन बार यह पुरस्कार हससिल कर चुके है। फीफा ने इसकी शुरुआत 1991 में की थी आश्रै अब यह बेलोन डि से जुड़ गया। इस पुरस्कार को फ्रांस की फुटबाल पत्रिका 1956 से दे रही है। फ्रांस के माइल प्लातिनी ही एकमात्र ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने लगातार तीन साल तक यह प्रतियोगिता जीती। उन्होंने 1983 से 1985 तक यह ट्राफी हासिल की लेकिन तब इसके लिए केवल यूरोपीय खिलाड़यों के नाम पर विचार किया जाता था।
मैसी अगर इस ट्राफी को तीसरी बार जीतते हैं तो 24 साल की उम्र तक जीन पुरस्कार हासिल करना विश्ष्टि उपलब्धि होगी। मैसी ने 2011 में बेहतरीन प्रदर्शन किया। उनकी अगुवाई में बार्सिलोना टीम ने चैपिंयस लीग, स्पेनिश लीग यूरोपीय सुपर कप और स्पेनिश कप जीते। मैसी ने 2011-12 में 53 गोल किएइसके अलावा उन्होंने कई गोल बनवाने में भी सहयोग दिया। मैसी ने इस सत्र में 31 गोल आगे। मैसी के साथ हालांकि यह बुरा रिकार्ड जुड़ा हुआ है कि वे अपनी राष्ट्रीय टीम की तरफ से कभी भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए। वे कोवा अमेरिका में भी कोई गोन नहीं कर पाए औश्र मेजबान अर्जेंटीना क्वार्टर final चरण से ही बाहर हो गई थी. इससे पहले विश्व कप 2010 में भी मैसी का यहीं हाल हुआ था।
ज्यूरिख में सोमवार को फिर से बार्सिलोना और रिअल मैड्रिड की 2010 की प्रतिद्धंद्धिता देखने को मिलेगी। सर्वश्रेष्ठ कोच की दौड़ में बार्सिलोनो के पेप गर्डिलो और मैड्रिड के जोस मारिन्हो आमने-सामने है। उनके अलावा मैनसेटर यूनाइटेड के कोच ऐलेक्स फर्गुसन भी इस दौड़ में शामिल है। माना जा रहा है कि मैड्रिड के कोच औश्र स्टार खिलाड़ी रोनाल्डो इस समारोह में भाग नहीं लेंगे क्योंकि उन्हें मंगलवार को होने वाले मैच के लिए मालगा जाना है। विश्व एकादश में भी इन दोनों क्लबों को अधिक प्रतिनिधत्व मिलने की संभावना है। इसका चयन फीफा और दुनिया भर की खिलाडियों की यूनियन करनी है।
Sunday, 11 December 2011
TODAYS THOUGHT
Help ever hurt never.
To get respect be an example.
Punishment is not the punishment rather its the time to realize the mistake.
Words are like chameleon which reflect their colour according to their environment.
हर दिल में एक राज है,
बस..........
कहने की जरुरत है,
तुझे पाने के लिए ,
मेरा मजहब ही काफी है............
-------------------------------------------
जो लोग खुश होते है......
वे ही दुःख में होते है,
जो दुःख में होते है,
वे ही अक्सर खुश होते है,
हम दुःख में रहकर भी,
खुश होते है